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Showing posts from 2021

करवाचौथ मजाक नही

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सभी महिलाओं को सादर समर्पित  🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻 करवाचौथ पर जोक्स भेज कर जो सभी गलती कर रहे वो ही आप भी कर रहे हैं ।  अचानक मन में कुछ सवाल भी खड़े हुए सोचा आपके समक्ष रख कर कुछ प्राश्चित करूँ । *कुछ लोग करवाचौथ पर जोक्स भेज रहे हैं कोई पतियों को उल्लू पूजा जायेगा , या फिर पत्नियों पर जोक्स की भूखी शेरनी , या फिर अलग अलग तरीके के मेसेज ।😡* सभी मेसेज का एक ही मतलब कि यह कोई त्योहार न होकर कोई ड्रामा सा हो🤔 रहा है।  *पतियों की पूजा दिखावे के लिए हो रही है।* एक बात समझ नही आई *किसी ने भी महिलाओं के इस कठिन तप रुपी व्रत की सराहना की? उनकी हौसला बढाने की कोशिश की ?* उनका व्रत सफ़ल हो और  *उनको ईश्वर इतनी शक्ति दे कि उनकी मनोकामना पूर्ण हो क्या किसी ने यह प्रार्थना की?* एक बात और कभी सोचा इस तरह के टपोरी टाइप मेसेज वैलेंटाइन डे के ऊपर क्यूँ नही बनते की आज कोई मुर्गा फंसेगा ,  *क्यूँ  *सिर्फ हिन्दू त्योहारों का मज़ाक बनता है।* कब समझेंगे हम ?  *कब सुधरेंगे हम?* *यह कोई साधारण व्रत नही है एक तप है जो सिर्फ एक भारतीय महिला ही कर सकती है। पू...

कोई बांझ नही कहेगा

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कोई बाझ नहीं कहेगा आधी रात का समय था रोज की तरह एक बुजुर्ग शराब के  नशे में अपने घर की  तरफ जाने वाली गली से झूमता हुआ जा रहा था, रास्ते में एक खंभे की लाइट जल  रही थी, उस खंभे के ठीक नीचे एक 15 से 16 साल की लड़की पुराने फटे कपड़े  में डरी सहमी सी अपने आँसू पोछते हुए खड़ी थी जैसे ही उस बुजुर्ग की नजर उस  लड़की पर पड़ी वह रूक सा गया, लड़की शायद उजाले की चाह में लाइट के खंभे  से लगभग चिपकी हुई सी थी, वह बुजुर्ग उसके करीब गया और उससे लड़खड़ाती जबान  से पूछा तेरा नाम क्या है, तू कौन है और इतनी रात को यहाँ क्या कर रही  है...? लड़की चुपचाप डरी सहमी नजरों से दूर किसी को देखे जा रही थी  उस बुजुर्ग ने जब उस तरफ देखा जहाँ लड़की देख रही थी तो वहाँ चार लड़के उस  लड़की को घूर रहे थे, उनमें से एक को वो बुजुर्ग जानता था, लड़का उस  बुजुर्ग को देखकर झेप गया और अपने साथियों के साथ वहाँ से चला गया लड़की उस  शराब के नशे में बुजुर्ग से भी सशंकित थी फिर भी उसने हिम्मत करके बताया  मेरा नाम रूपा है मैं अनाथाश्रम से भाग आई हूँ, वो लोग ...

बुजुर्ग डाकिया छोटी लडकी

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एक दिन एक बुजुर्ग डाकिये ने एक घर के दरवाजे पर दस्तक देते हुए कहा..."चिट्ठी ले लीजिये।" आवाज़ सुनते ही तुरंत अंदर से एक लड़की की आवाज गूंजी..." अभी आ रही हूँ...ठहरो।" लेकिन लगभग पांच मिनट तक जब कोई न आया तब डाकिये ने फिर कहा.."अरे भाई! कोई है क्या, अपनी चिट्ठी ले लो...मुझें औऱ बहुत जगह जाना है..मैं ज्यादा देर इंतज़ार नहीं कर सकता....।" लड़की की फिर आवाज आई...," डाकिया चाचा , अगर आपको जल्दी है तो दरवाजे के नीचे से चिट्ठी अंदर डाल दीजिए,मैं आ रही हूँ कुछ देर औऱ लगेगा ।  " अब बूढ़े डाकिये ने झल्लाकर कहा,"नहीं,मैं खड़ा हूँ,रजिस्टर्ड चिट्ठी है,किसी का हस्ताक्षर भी चाहिये।" तकरीबन दस मिनट बाद दरवाजा खुला।  डाकिया इस देरी के लिए ख़ूब झल्लाया हुआ तो था ही,अब उस लड़की पर चिल्लाने ही वाला था लेकिन, दरवाजा खुलते ही वह चौंक गया औऱ उसकी आँखें खुली की खुली रह गई।उसका सारा गुस्सा पल भर में फुर्र हो गया। उसके सामने एक नन्ही सी अपाहिज कन्या जिसके एक पैर नहीं थे, खड़ी थी।  लडक़ी ने बेहद मासूमियत से डाकिये की तरफ़ अपना हाथ बढ़ाया औऱ कहा...दो मेरी चिट्ठी.....

जरूरत हो तो ले जाये-अतिरिक्त हो तो दे जाये

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किसी गांव में एक सेठ रहता था. उसका एक ही बेटा था, जो व्यापार के काम से परदेस गया हुआ था.  सेठ की बहू एक दिन कुएँ पर पानी भरने गई. घड़ा जब भर गया तो उसे उठाकर कुएँ के मुंडेर पर रख दिया और अपना हाथ-मुँह धोने लगी.  तभी कहीं से चार राहगीर वहाँ आ पहुँचे. एक राहगीर बोला, "बहन, मैं बहुत प्यासा हूँ. क्या मुझे पानी पिला दोगी?" सेठ की बहू को पानी पिलाने में थोड़ी झिझक महसूस हुई, क्योंकि वह उस समय कम कपड़े पहने हुए थी. उसके पास लोटा या गिलास भी नहीं था जिससे वह पानी पिला देती. इसी कारण वहाँ उन राहगीरों को पानी पिलाना उसे ठीक नहीं लगा. बहू ने उससे पूछा, "आप कौन हैं?" राहगीर ने कहा, "मैं एक यात्री हूँ" बहू बोली, "यात्री तो संसार में केवल दो ही होते हैं, आप उन दोनों में से कौन हैं? अगर आपने मेरे इस सवाल का सही जवाब दे दिया तो मैं आपको पानी पिला दूंगी. नहीं तो मैं पानी नहीं पिलाऊंगी." बेचारा राहगीर उसकी बात का कोई जवाब नहीं दे पाया.    तभी दूसरे राहगीर ने पानी पिलाने की विनती की.    बहू ने दूसरे राहगीर से पूछा, "अच्छा तो आप बताइए कि आप कौन हैं?...

‘मन चंगा, तो कठौती में गंगा’

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एक दिन संत रैदास (रविदास) अपनी झोपड़ी में बैठे प्रभु का स्मरण कर रहे थे। तभी एक राहगीर ब्राह्मण उनके पास अपना जूता ठीक कराने आया! रैदास ने पूछा कहां जा रहे हैं, ब्राह्मण बोला गंगा स्नान करने जा रहा हूं। जूता ठीक करने के बाद ब्राह्मण द्वारा दी मुद्रा को रैदासजी ने कहा कि आप यह मुद्रा मेरी तरफ से मां गंगा को चढ़ा देना। ब्राह्मण जब गंगा पहुंचा और गंगा स्नान के बाद जैसे ही ब्राह्मण ने कहा- हे गंगे रैदास की मुद्रा स्वीकार करो, तभी गंगा से एक हाथ आया और उस मुद्रा को लेकर बदले में ब्राह्मण को एक सोने का कंगन दे दिया। ब्राह्मण जब गंगा का दिया कंगन लेकर वापस लौट रहा था, तब उसके मन में विचार आया कि रैदास को कैसे पता चलेगा कि गंगा ने बदले में कंगन दिया है, मैं इस कंगन को राजा को दे देता हूं, जिसके बदले मुझे उपहार मिलेंगे। उसने राजा को कंगन दिया, बदले में उपहार लेकर घर चला गया। जब राजा ने वो कंगन रानी को दिया तो रानी खुश हो गई और बोली मुझे ऐसा ही एक और कंगन दूसरे हाथ के लिए चाहिए। राजा ने ब्राह्मण को बुलाकर कहा वैसा ही कंगन एक और चाहिए, अन्यथा राजा के दंड का पात्र बनना पड़े...

श्री राधे-राधे

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मत ढूँढ़ सहारौ काऊ कौ,🌹☘️🌹        🌹☘️🌹चिंता तज माला झोरी की। ब्रषभानु नंदिनी सहज सुलभ,🌹☘️🌹       🌹☘️🌹 जय जय राधे रसबोरी की। करुणामय दीन पुकार सुनैं,🌹☘️🌹         🌹☘️🌹 रक्षक हैं जीवन डोरी की। खुद बाँह पकरिकैं स्याम चलैं,🌹☘️🌹      🌹🌹 जिनपै हो कृपा किशोरी की।।🌹🌹 🍀꧁!!श्री Զเधॆ Զเधॆ जी !!꧂🍀