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कभी नेनुँआ टाटी पे चढ़ के रसोई के दो महीने का इंतज़ाम कर देता था। कभी खपरैल की छत पे चढ़ी लौकी महीना भर निकाल देती थी, कभी बैसाख में दाल और भतुआ से बनाई सूखी कोहड़ौरी, सावन भादो की सब्जी का खर्चा निकाल देती थी‌! वो दिन थे, जब सब्जी पे खर्चा पता तक नहीं चलता था। देशी टमाटर और मूली जाड़े के सीजन में भौकाल के साथ आते थे,लेकिन खिचड़ी आते-आते उनकी इज्जत घर जमाई जैसी हो जाती थी! तब जीडीपी का अंकगणितीय करिश्मा नहीं था। ये सब्जियाँ सर्वसुलभ और हर रसोई का हिस्सा थीं। लोहे की कढ़ाई में, किसी के घर रसेदार सब्जी पके तो, गाँव के डीह बाबा तक गमक जाती थी। धुंआ एक घर से निकला की नहीं, तो आग के लिए लोग चिपरि लेके दौड़ पड़ते थे संझा को रेडियो पे चौपाल और आकाशवाणी के सुलझे हुए समाचारों से दिन रुखसत लेता था! रातें बड़ी होती थीं, दुआर पे कोई पुरनिया आल्हा छेड़ देता था तो मानों कोई सिनेमा चल गया हो। किसान लोगो में कर्ज का फैशन नहीं था, फिर बच्चे बड़े होने लगे, बच्चियाँ भी बड़ी होने लगीं! बच्चे सरकारी नौकरी पाते ही,अंग्रेजी इत्र लगाने लगे। बच्चियों के पापा सरकारी दामाद में नारायण का रूप देखने लगे, किसान क्रेड...

गोरा-बादल

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#गोरा_बादल : वीरता और शौर्य की अद्भुत कहानी , जिन्होंने अपनी वीरता से खिलजी को उसकी ओकात दिखाई थी ----------------------------------------------------------------- गौरा और बादल ऐसे ही दो शूरवीरों के नाम है, जिनके पराक्रम से राजस्थान की मिट्टी बलिदानी है . जीवन परिचय और इतिहास : गौरा ओर बदल दोनों चाचा भतीजे जालोर के चौहान वंश से सम्बन्ध रखते थे | मेवाड़ की धरती की गौरवगाथा गोरा और बादल जैसे वीरों के नाम के बिना अधूरी है. हममें से बहुत से लोग होंगे, जिन्होंने इन शूरवीरों का नाम तक न सुना होगा ! मगर मेवाड़ की माटी में आज भी इनके रक्त की लालिमा झलकती है. मुहणोत नैणसी के प्रसिद्ध काव्य ‘मारवाड़ रा परगना री विगत’ में इन दो वीरों के बारे पुख्ता जानकारी मिलती है. इस काव्य की मानें तो रिश्ते में चाचा और भतीजा लगने वाले ये दो वीर जालौर के चौहान वंश से संबंध रखते थे, जो रानी पद्मिनी की विवाह के बाद चितौड़ के राजा रतन सिंह के राज्य का हिस्सा बन गए थे। ये दोनों इतने पराक्रमी थे कि दुश्मन उनके नाम से ही कांपते थे. कहा जाता है कि एक तरफ जहां चाचा गोरा दुश्मनों के लिए काल के सामान थे, वहीं द...

सनातन(हिन्दू) नव वर्ष

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*◆ नववर्ष तिथि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा का महत्त्व* नव वर्ष 2079, "नल" नाम सम्वत्सर, चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, 2 अप्रैल 2022 से प्रारम्भ हो रहा है, इसका महत्त्व जानना हम सभी के लिए आवश्यक है... चैत्र शुक्ल प्रतिपदा यानी चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की पहली तिथि, बढ़ते हुए चन्द्र के साथ नए वर्ष का आगमन। 1 अरब 95 करोड़ 58 लाख 85 हज़ार 123 वर्ष पहले चैत्र मास के शुक्लपक्ष में सूर्योदय के समय ब्रह्माजी ने जगत की रचना की थी।१ आरम्भ है सृष्टि का यह पावन प्रतिपदा। महाराज इक्ष्वाकु का राज्यारोहण है यह प्रतिपदा। सतयुग व प्रभव आदि 60 संवत्सरों का आरम्भ है चैत्र शुक्ल की प्रतिपदा।२ चन्द्रमा और सूर्य के वर्ष का आरम्भ है मधुमास की धवल प्रतिपदा।३ इस चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को सूर्योदय में जो वार होता है उसी का अधीश वर्ष का राजा होता है।४ लंका नगरी में मधुमास (चैत्र) के सितपक्ष के आरम्भ होने पर सूर्योदय के समय जब रविवार था तब दिन, मास, पर्व, युगादि व युगपत आदि की प्रवृत्ति हुई थी।५ सम्राट विक्रमादित्य का शासनग्रहणदिवस है चैत्र शुक्ल प्रतिपदा। 180 देशों के अधीश्वर शकारि सम्राट विक्रमादित्य जिन्होंन...

करवाचौथ मजाक नही

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सभी महिलाओं को सादर समर्पित  🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻 करवाचौथ पर जोक्स भेज कर जो सभी गलती कर रहे वो ही आप भी कर रहे हैं ।  अचानक मन में कुछ सवाल भी खड़े हुए सोचा आपके समक्ष रख कर कुछ प्राश्चित करूँ । *कुछ लोग करवाचौथ पर जोक्स भेज रहे हैं कोई पतियों को उल्लू पूजा जायेगा , या फिर पत्नियों पर जोक्स की भूखी शेरनी , या फिर अलग अलग तरीके के मेसेज ।😡* सभी मेसेज का एक ही मतलब कि यह कोई त्योहार न होकर कोई ड्रामा सा हो🤔 रहा है।  *पतियों की पूजा दिखावे के लिए हो रही है।* एक बात समझ नही आई *किसी ने भी महिलाओं के इस कठिन तप रुपी व्रत की सराहना की? उनकी हौसला बढाने की कोशिश की ?* उनका व्रत सफ़ल हो और  *उनको ईश्वर इतनी शक्ति दे कि उनकी मनोकामना पूर्ण हो क्या किसी ने यह प्रार्थना की?* एक बात और कभी सोचा इस तरह के टपोरी टाइप मेसेज वैलेंटाइन डे के ऊपर क्यूँ नही बनते की आज कोई मुर्गा फंसेगा ,  *क्यूँ  *सिर्फ हिन्दू त्योहारों का मज़ाक बनता है।* कब समझेंगे हम ?  *कब सुधरेंगे हम?* *यह कोई साधारण व्रत नही है एक तप है जो सिर्फ एक भारतीय महिला ही कर सकती है। पू...

कोई बांझ नही कहेगा

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कोई बाझ नहीं कहेगा आधी रात का समय था रोज की तरह एक बुजुर्ग शराब के  नशे में अपने घर की  तरफ जाने वाली गली से झूमता हुआ जा रहा था, रास्ते में एक खंभे की लाइट जल  रही थी, उस खंभे के ठीक नीचे एक 15 से 16 साल की लड़की पुराने फटे कपड़े  में डरी सहमी सी अपने आँसू पोछते हुए खड़ी थी जैसे ही उस बुजुर्ग की नजर उस  लड़की पर पड़ी वह रूक सा गया, लड़की शायद उजाले की चाह में लाइट के खंभे  से लगभग चिपकी हुई सी थी, वह बुजुर्ग उसके करीब गया और उससे लड़खड़ाती जबान  से पूछा तेरा नाम क्या है, तू कौन है और इतनी रात को यहाँ क्या कर रही  है...? लड़की चुपचाप डरी सहमी नजरों से दूर किसी को देखे जा रही थी  उस बुजुर्ग ने जब उस तरफ देखा जहाँ लड़की देख रही थी तो वहाँ चार लड़के उस  लड़की को घूर रहे थे, उनमें से एक को वो बुजुर्ग जानता था, लड़का उस  बुजुर्ग को देखकर झेप गया और अपने साथियों के साथ वहाँ से चला गया लड़की उस  शराब के नशे में बुजुर्ग से भी सशंकित थी फिर भी उसने हिम्मत करके बताया  मेरा नाम रूपा है मैं अनाथाश्रम से भाग आई हूँ, वो लोग ...

बुजुर्ग डाकिया छोटी लडकी

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एक दिन एक बुजुर्ग डाकिये ने एक घर के दरवाजे पर दस्तक देते हुए कहा..."चिट्ठी ले लीजिये।" आवाज़ सुनते ही तुरंत अंदर से एक लड़की की आवाज गूंजी..." अभी आ रही हूँ...ठहरो।" लेकिन लगभग पांच मिनट तक जब कोई न आया तब डाकिये ने फिर कहा.."अरे भाई! कोई है क्या, अपनी चिट्ठी ले लो...मुझें औऱ बहुत जगह जाना है..मैं ज्यादा देर इंतज़ार नहीं कर सकता....।" लड़की की फिर आवाज आई...," डाकिया चाचा , अगर आपको जल्दी है तो दरवाजे के नीचे से चिट्ठी अंदर डाल दीजिए,मैं आ रही हूँ कुछ देर औऱ लगेगा ।  " अब बूढ़े डाकिये ने झल्लाकर कहा,"नहीं,मैं खड़ा हूँ,रजिस्टर्ड चिट्ठी है,किसी का हस्ताक्षर भी चाहिये।" तकरीबन दस मिनट बाद दरवाजा खुला।  डाकिया इस देरी के लिए ख़ूब झल्लाया हुआ तो था ही,अब उस लड़की पर चिल्लाने ही वाला था लेकिन, दरवाजा खुलते ही वह चौंक गया औऱ उसकी आँखें खुली की खुली रह गई।उसका सारा गुस्सा पल भर में फुर्र हो गया। उसके सामने एक नन्ही सी अपाहिज कन्या जिसके एक पैर नहीं थे, खड़ी थी।  लडक़ी ने बेहद मासूमियत से डाकिये की तरफ़ अपना हाथ बढ़ाया औऱ कहा...दो मेरी चिट्ठी.....

जरूरत हो तो ले जाये-अतिरिक्त हो तो दे जाये

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किसी गांव में एक सेठ रहता था. उसका एक ही बेटा था, जो व्यापार के काम से परदेस गया हुआ था.  सेठ की बहू एक दिन कुएँ पर पानी भरने गई. घड़ा जब भर गया तो उसे उठाकर कुएँ के मुंडेर पर रख दिया और अपना हाथ-मुँह धोने लगी.  तभी कहीं से चार राहगीर वहाँ आ पहुँचे. एक राहगीर बोला, "बहन, मैं बहुत प्यासा हूँ. क्या मुझे पानी पिला दोगी?" सेठ की बहू को पानी पिलाने में थोड़ी झिझक महसूस हुई, क्योंकि वह उस समय कम कपड़े पहने हुए थी. उसके पास लोटा या गिलास भी नहीं था जिससे वह पानी पिला देती. इसी कारण वहाँ उन राहगीरों को पानी पिलाना उसे ठीक नहीं लगा. बहू ने उससे पूछा, "आप कौन हैं?" राहगीर ने कहा, "मैं एक यात्री हूँ" बहू बोली, "यात्री तो संसार में केवल दो ही होते हैं, आप उन दोनों में से कौन हैं? अगर आपने मेरे इस सवाल का सही जवाब दे दिया तो मैं आपको पानी पिला दूंगी. नहीं तो मैं पानी नहीं पिलाऊंगी." बेचारा राहगीर उसकी बात का कोई जवाब नहीं दे पाया.    तभी दूसरे राहगीर ने पानी पिलाने की विनती की.    बहू ने दूसरे राहगीर से पूछा, "अच्छा तो आप बताइए कि आप कौन हैं?...

‘मन चंगा, तो कठौती में गंगा’

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एक दिन संत रैदास (रविदास) अपनी झोपड़ी में बैठे प्रभु का स्मरण कर रहे थे। तभी एक राहगीर ब्राह्मण उनके पास अपना जूता ठीक कराने आया! रैदास ने पूछा कहां जा रहे हैं, ब्राह्मण बोला गंगा स्नान करने जा रहा हूं। जूता ठीक करने के बाद ब्राह्मण द्वारा दी मुद्रा को रैदासजी ने कहा कि आप यह मुद्रा मेरी तरफ से मां गंगा को चढ़ा देना। ब्राह्मण जब गंगा पहुंचा और गंगा स्नान के बाद जैसे ही ब्राह्मण ने कहा- हे गंगे रैदास की मुद्रा स्वीकार करो, तभी गंगा से एक हाथ आया और उस मुद्रा को लेकर बदले में ब्राह्मण को एक सोने का कंगन दे दिया। ब्राह्मण जब गंगा का दिया कंगन लेकर वापस लौट रहा था, तब उसके मन में विचार आया कि रैदास को कैसे पता चलेगा कि गंगा ने बदले में कंगन दिया है, मैं इस कंगन को राजा को दे देता हूं, जिसके बदले मुझे उपहार मिलेंगे। उसने राजा को कंगन दिया, बदले में उपहार लेकर घर चला गया। जब राजा ने वो कंगन रानी को दिया तो रानी खुश हो गई और बोली मुझे ऐसा ही एक और कंगन दूसरे हाथ के लिए चाहिए। राजा ने ब्राह्मण को बुलाकर कहा वैसा ही कंगन एक और चाहिए, अन्यथा राजा के दंड का पात्र बनना पड़े...

श्री राधे-राधे

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मत ढूँढ़ सहारौ काऊ कौ,🌹☘️🌹        🌹☘️🌹चिंता तज माला झोरी की। ब्रषभानु नंदिनी सहज सुलभ,🌹☘️🌹       🌹☘️🌹 जय जय राधे रसबोरी की। करुणामय दीन पुकार सुनैं,🌹☘️🌹         🌹☘️🌹 रक्षक हैं जीवन डोरी की। खुद बाँह पकरिकैं स्याम चलैं,🌹☘️🌹      🌹🌹 जिनपै हो कृपा किशोरी की।।🌹🌹 🍀꧁!!श्री Զเधॆ Զเधॆ जी !!꧂🍀

बिना श्रृंगार नारी अधूरी

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लोग कहते है कि... औरते बहुत श्रृंगार करती हैं... सच ही तो है... औरतें सिर्फ चेहरे पर ही नही..  बल्कि घर ,परिवार ,बच्चे, पति ,समाज सभी की  कमियों पर हमेशा श्रृंगार ही करती रहती हैं... दोस्तो की गलतियों पर श्रृंगार ... बेहतर शिक्षा न् मिलने पर माता - पिता पर श्रृंगार ... शादी होने पर ससुराल वालों के तानो पर श्रृंगार.. मायके की कमियों पर श्रृंगार ... पति की बेवफाई पर श्रृंगार ... रिश्तों की बदनीयती पर श्रृंगार ... बच्चों की कमियो पर मेकअप और  उनकी गलतियों पर श्रृंगार ... बुढ़ापे में दामाद के द्वारा किया गए अनादर पर श्रृंगार ...  बहू की बेरुखी पर श्रृंगार ... और आखिर में... बुढ़ापे में परिवार में अस्तित्वहीन होने पर श्रृंगार ... एक औरत जन्म से लेकर मृत्यु तक मेकअप ही तो करती रहती है... सिर्फ एक ही आस में कि उसके प्रयास से सभी आपस में प्यार से बंधे रहे तभी तो कहते हैं बिना श्रृंगार अधूरी नारी...

नारी शक्ति

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#नारी_शक्ति एक प्यासा आदमी कुएं के पास  गया ,वहां एक औरत पानी भर रही थी।  औरत ने प्यासे आदमी को पानी पिलाया उसके बाद उस आदमी ने औरत से पूछा कि आप मुझे औरतों की चालाकी के बारे में बताओ, इतना कहने पर वह औरत जोर जोर से चिल्लाने लगी बचाओ बचाओ इतना सुनकर गांव के लोग कुए की तरह दौड़ने लगे तो उस आदमी ने कहा कि तुम ऐसा क्यों कर रही हो, तो उस औरत ने कहा ताकि गांव वाले आए और आपको खूब पीटा इतना पीटे की पीट-पीटकर आप को मार डाले तो उस आदमी ने कहा मुझे माफ करें, मैं तो आपको एक भली और नेक इज्ज़तदार औरत समझ रहा था। औरत ने मटके का सारा पानी अपने बदन पर डाल लिया गांव वाले आए तो पूछा की क्या हुआ औरत ने कहा मैं कुएं में गिर गई थी इस भले आदमी ने मुझको बचा लिया गांव वालों ने उस आदमी की तारीफ की और उसको कंधों पर उठा लिया उसको खुश कर दिया और उसको इनाम भी दिया।  जब गांव वाले चले गए तो औरत ने उस मुसाफ़िर से कहा अगर तुम औरत को तकलीफ देंगे तो वो तुम्हारे सुख और चैन छीन लेगी और अगर खुश रखोगे तो तुम्हें मौत के मुंह से भी निकाल लेगी...।

मोलभाव ना करे।

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एक महिला ने एक अंडे बेचने वाले बूढ़े व्यक्ति से पूछा "आप अंडे क्या भाव बेच रहे हो ?"  बेचने वाले बूढ़े व्यक्ति ने उत्तर दिया "मैडम ₹ 5 का एक......  महिला ने विक्रेता से कहा मैं तो ₹ 25 में 6 लूंगी वरना मैं जाती हूँ। बूढ़े विक्रेता ने उत्तर दिया - आइये और जो कीमत आप बता रही हैं, उसी भाव में ले जाइए। शायद यह मेरी अच्छी बोहनी हो जाये । क्योंकि आज अभी तक मैं एक भी अंडा नहीं बेच पाया हूँ। उस महिला ने अंडे खरीदे और इस तरह चली गई, जैसे उसने बहुत बड़ी लड़ाई में जीत हासिल की हो। वह अपनी क़ीमती गाड़ी में बैठी और अपने मित्र के साथ एक महँगे रेस्टोरेंट में पहुंच गई !वहां पर उसने और उसके मित्र ने अपनी पसन्दीदा चीजें मंगवाईं। उन्होंने अपने द्वारा दिये गए आर्डर के सामान में से कुछ कुछ खाया और बहुत सारा सामान छोड़ दिया। तब वह महिला बिल का भुगतान करने के लिए गई। कुल ₹ 1400 का बिल बना। उसने रेस्टोरेंट के मालिक को ₹ 1500 दिए तथा उससे कहा कि बाकी के पैसे रख लो। यह घटना रेस्टोरेंट के मालिक के लिए बेशक एक साधारण सी घटना रही होगी लेकिन उस बेचारे गरीब अंडे बेचने वाले बूढ़े व्यक्ति के लिए बहुत...

परिवर्तित होती भारतीय नारी

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#परिवर्तित_होती_भारतीय_नारी.....✍️ सन 1980 तक लड़कियाँ कालेज में साड़ी पहनती थी या फिर सलवार सूट।  इसके बाद साड़ी पूरी तरह गायब हुई और सलवार सूट के साथ जीन्स आ गया।  2005 के बाद सलवार सूट लगभग गायब हो गया और इसकी जगह Skin Tight काले सफेद #स्लैक्स आ गए, फिर 2010 तंक लगभग #पारदर्शी_स्लैक्स आ गए जिसमे #आंतरिक_वस्त्र पूरी तरह स्प्ष्ट दिखते हैं। फिर सूट, जोकि पहले घुटने या जांघो के पास से 2 भाग मे कटा होता था, वो 2012 के बाद कमर से 2 भागों में बंट गया और  फिर 2015 के बाद यह सूट लगभग ऊपर नाभि के पास से 2 भागो मे बंट गया, जिससे कि लड़की या महिला के नितंब पूरी तरह स्प्ष्ट दिखाई पड़ते हैं और 2 पहिया गाड़ी चलाती या पीछे बैठी महिला अत्यंत विचित्र सी दिखाई देती है, मोटी जाँघे, दिखता पेट। आश्चर्य की बात यह है कि यह पहनावा कॉलेज से लेकर 40 वर्ष या ऊपर उम्र की महिलाओ में अब भी दिख रहा है। बड़ी उम्र की महिलायें छोटी लड़कियों को अच्छा सिखाने की बजाए उनसे बराबरी की होड़ लगाने लगी है। नकलची महिलाए,  अब कुछ नया हो रहा 2018 मे, स्लैक्स ही कुछ Printed या रंग बिरंगा सा हो गय...

कभी यूँ ही बैठ लिया करो

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कभी यूँ ही बैठ लिया करो मेरे लिए रिक्शे में बैठना एक कठिन निर्णय होता रहा है, रिक्शे की सवारी के समय मेरा ध्यान हमेशा उसकी पैरों की पिंडलियों पर रहता था , कि कितनी मेहनत से खींचता है रिक्शा , सड़क पर कोई भी मोटरसाइकिल वाला या कार वाला उसको ऐसे हिकारत की निगाह से देखता है जैसे कोई जुर्म कर दिया हो, मैनें नोटिस किया अक्सर कारों वालों के अहम के सामने रिक्शेवाले भाई को अपने रिक्शे में ब्रेक लगाने पड़ते थे , गलती किसी की हो थप्पड़ हमेशा रिक्शेवाले के गाल पर ही पड़ता था। पुलिसवाले के गुस्से का सबसे पहला शिकार ये बेचारा रिक्शेवाला ही होता है।  बेचारा 2 आंसू टपकाता, अपने गमछे से आँसू पोंछता फिर से पैडल पर जोर मार के चल पड़ता।  यार ये दौलत कमाने नहीं निकले , सिर्फ 2 वक़्त की रोटी मिल जाये, बच्चे को भूखा न सोना पड़े बस इसीलिए पूरी जान लगा देते हैं  कभी इनसे मोल भाव मत करना दे देना कुछ एक्स्ट्रा , ईश्वर भी फिर प्लान करेगा आपको कुछ एक्स्ट्रा देने का  कभी कभी यूँही सवारी कर लेना रिक्शे की मदद हो जाएगी, भीख देकर उनका अपमान मत करना ,  गरीब हैं भिखारी नहीं  बस कभी कभी...

😥😥😥

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लड़के ने नम्बर मांगा आप ने दे दिया...  लड़के ने तस्वीर मांगी आप ने दे दी... लड़के ने वीडियो कॉल के लिए कहा आप ने कर ली... लड़के ने दुपट्टा हटाने को कहा आप ने हटा दिया... लड़के ने कुछ देखने की ख्वाहिश की आप ने पूरी कर दी... लड़के ने मिलने को कहा आप माँ बाप को धोखा देकर आशिक़ से मिलने पहुंच गयीं... लड़के ने बाग में बैठ कर आप की तारीफ़ करते हुए आपको सरसब्ज़ बाग दिखाए आपने देख लिये... फिर जूस कार्नर पर जूस पीते वक़्त लड़के ने हाथ लगाया, इशारे किये, मगर कोई बात नहीं अब नया ज़माना है यह सब तो चलता ही है... फिर लड़के ने होटल में कमरा लेने की बात की, आप ने शर्माते हुए इंकार कर दिया, कि शादी से पहले यह सब अच्छा तो नहीं लगता न... फिर दो तीन बार कहने पर आप तैयार हो गयीं होटल के कमरे में जाने के लिए... आप दोनों ने मिल कर खूब एंजॉय किया... अंडरस्टेंडिंग के नाम पर दुल्हा दुल्हन बन गए बस बच्चा पैदा न हो इस पर ध्यान दिया... फिर एक दिन झगड़ा हुआ और सब खत्म क्योंकि हराम रिश्तों का अंजाम कुछ ऐसा ही होता है... लेकिन लेकिन... यहां सरासर मर्द गलत नहीं है, वह भेड़िया है, वह मुजरिम...

नवरात्रि

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नवरात्र - कुलदेवी - नवदुर्गा उपासना  🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺        तिथि नक्षत्र पंचांग मुजब अश्विन मासमें ब्रह्मांड की सर्व देवी शक्तियां पूर्ण जागृत स्वरूपमे पृथ्वीलोकमें विचरण करती है इसलिए नाव रात्रिमें अलग अलग शक्तिधाराओ को अलग अलग दुर्गा स्वरूप पूजा जाता है । ऐसे तो महालक्ष्मी , महासास्वती , महाकाली इन तीन प्रमुख महादेवीओ के सत,रजस,तम ऐसे तीन तीन स्वरूप नोउ स्वरूप है जो विविध नामो से भी पूजा जाता है । अम्बा , गायत्री , सरस्वती , लक्ष्मी , महाकाली , अन्नपूर्णा ... वो सब रूप ही नवदुर्गा के अवतार है । निराकार ब्रह्म शिव की शक्ति महामाया के ही ये सब स्वरूप है । हरेक वंश गोत्र की कुलदेवी ही महामाया स्वरूप है इसलिए देवी के किसी भी स्वरूप की पूजा कुलदेवी के स्वरूपमे ही करनी होती है । प्रत्येक युग में 9 देवियां अलग-अलग होती हैं. यह एक वृहद विषय है, जिसका उल्लेख यहां संभव नहीं है. शीघ्र सिद्धि के लिए नियत जप-पूजन इत्यादि आवश्यक है. इससे भी अधिक आवश्यक है श्रद्धा व विश्वास. कलियुग में प्रत्येक‍ दिन की देवियां अलग-अलग अधिष्ठात्री हैं, जिनकी साधना से कामना-पू...

बेटियाँ

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#Story✍️✍️                       #बाप_बेटी👨‍👩‍👧👨‍👧 बेटी की विदाई के वक्त बाप सबसे आखरी में रोता है ,बाकी सब भावुकता में रोते है पर बाप उस बेटी के बचपन से विदाई तक के पल याद कर कर के रोता है माँ बेटी के रिश्तों पर तो बात होती ही है पर बाप ओर बेटी का रिश्ता भी समुद्र से गहरा है,,हर बाप घर के बेटे को गाली देता है धमकाता है मारता है पर वही बाप अपनी बेटी की हर गलती नकली दादा गिरी से नजर अंदाज कर देता है ,बेटे ने कुछ मांगा तो एक बार डाट देता है पर बेटी ने धीरे से भी कुछ मांगा तो बाप को सुना जाता है और जेब मे हो न हो बेटी की इच्छा पूरी कर देता है,,दुनिया उस बाप का सबकुछ लूट ले तो भी वो हार नही मानता पर अपनी बेटी के आंख के आंसू देख कर खुद अंदर से बिखर जाए उसे बाप कहते है ,,ओर बेटी भी जब घर मे रहती है तो उसे हर बात में बाप का घमंड होता है किसी ने कुछ कहा कि तपाक से बोलती है पापा को आने दे फिर बताती हु ,बेटी घर मे रहती तो माँ के आंचल में है पर बेटी की हिम्मत उसका बाप रहता है ,,बेटी की जब शादी में विदाई होती है तब वो सबसे...

Love Story

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❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤ एक बार एक लडके को  अपनी ही कॉलेज कि एक लडकी से प्यार हो गया था लडके ने लडकी को दोस्त बनाया पर अपने प्यार का इजहार ना कर सका °°° क्योँकी वो डरता था कि कहीँ लडकी ने मना कर दिया तो दोस्ती भी टुट जाऐगी  और वो ऊससे कभी बात तक  नही करेगी ईसी वजह से वो लडका परपोज करनै से डरता था °°° उनकी दोस्ती जितनी गहरी हो रही थी  लडके का प्यार भी उतना ही गहरा होता गया °°° धीरे धीरे कॉलेज भी खतम हौ गया पर लडके ने अपने प्यार का  इजहार नही किया वो डर उसे प्यार का इजहार करने से रोक लेता था °°° कॉलेज पुरा हो गया था  इसलिए वो बाहर ही मिलते थे..! एक दिन लडके ने हिम्मत करके  लडकी को कॉल किया और कहॉ कि मुझे तुमसे कुछ  जरुरी बात करनी है  लडकी ने कहॉ कि मुझे भी तुमसे  कुछ जरुरी बात करनी ह °°°ै होटल मै मिलते है  लडका शाम को ये ठान कर गया कि आज मै अपने प्यार का  इजहार करकै हि रहुँगा  चाहै कुछ भी हो लडकी कहती है  कि पहले तुम अपनी बात कहोगे या मै अपनी बात कहुँ  लडका कहता है कि पहले तुम ही कहो लडकी कहती ह °°°ै कि अगले हप्ते मै...

कान की आत्मकथा 🤣

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👂कान की आत्मकथा👂        😜😜😜😜😜😜 मैं कान हूँ........👂 हम दो हैं...👂👂  दोनों जुड़वां भाई... लेकिन........... हमारी किस्मत ही ऐसी है.... कि आज तक हमने एक दूसरे को देखा तक नहीं 😪 पता नहीं..  कौन से श्राप के कारण हमें विपरित दिशा में चिपका कर भेजा गया है 😠... दु:ख सिर्फ इतना ही नहीं है...   हमें जिम्मेदारी सिर्फ सुनने की मिली है...... गालियाँ हों या तालियाँ.., अच्छा हो या बुरा.. सब  हम ही सुनते हैं... धीरे धीरे हमें खूंटी समझा जाने लगा... चश्मे का बोझ डाला गया, फ्रेम की डण्डी को हम पर फँसाया गया... ये दर्द सहा हमने... क्यों भाई..??? चश्मे का मामला आंखो का है तो हमें बीच में घसीटने का मतलब क्या है...??? हम बोलते नहीं  तो क्या हुआ,  सुनते तो हैं ना... हर जगह बोलने वाले ही क्यों आगे रहते है....??? बचपन में पढ़ाई में  किसी का दिमाग काम न करे तो मास्टर जी हमें ही मरोड़ते हैं 😡... जवान हुए तो आदमी,औरतें सबने सुन्दर सुन्दर लौंग,बालियाँ, झुमके आदि बनवाकर हम पर ही लटकाये...!!!  छेदन हमारा हुआ, और तारीफ चेहरे की ...! और...

तितली का संघर्ष!!!

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एक बार एक आदमी को अपने बगीचे में टहलते हुए किसी टहनी से लटकता हुआ एक तितली का कोकून दिखाई पड़ा| अब हर रोज़ वो आदमी उसे देखने लगा , और एक दिन उसने गौर किया कि उस कोकून में एक छोटा सा छेद बन गया है| उस दिन वो वहीँ बैठ गया और घंटो उसे देखता रहा| उसने देखा की तितली उस खोल से बाहर निकलने की बहुत कोशिश कर रही है , पर बहुत देर तक प्रयास करने के बाद भी वो उस छेद से नहीं निकल पायी, और फिर वो बिलकुल शांत हो गयी मानो उसने हार मान ली हो| इसलिए उस आदमी ने निश्चय किया कि वो उस तितली की मदद करेगा| उसने एक कैंची उठायी और कोकून की opening को इतना बड़ा कर दिया की वो तितली आसानी से बाहर निकल सके, और यही हुआ| तितली बिना किसी और संघर्ष के आसानी से बाहर निकल आई, पर उसका शरीर सूजा हुआ था, और पंख सूखे हुए थे| वो आदमी तितली को ये सोच कर देखता रहा कि वो किसी भी वक़्त अपने पंख फैला कर उड़ने लगेगी, पर ऐसा कुछ भी नहीं हुआ| इसके उलट बेचारी तितली कभी उड़ ही नहीं पाई और उसे अपनी बाकी की ज़िन्दगी इधर-उधर घिसटते हुए बीतानी पड़ी| वो आदमी अपनी दया और जल्दबाजी में ये नहीं समझ पाया की दरअसल कोकून से निकलने की प...